गणतंत्र

गणतंत्र

राजा-शासन गया दूर कही, गणतंत्र का यह देश है |
चलता यहाँ सामंतवाद नहीं, प्रजातंत्र का यह देश है |

दिया गया है प्रारब्ध देश का, प्रजा के कर में;
किन्तु है राजनीति चल रही यहाँ सबके सर में |
तोड़ते है और बाँटने है प्रजा को अपने धर्म से,
विमुख करने देश की प्रजा को निज कर्म से |

यद्यपि है शक्ति आज भी प्रजा के साथ,
यदि मिल जाए समस्त भारतीयों के हाथ;
जोड़ी जा सकती है शक्ति एक मुष्टि में,
बज सकता है डंका अपना भी सृष्टि में |

यदि मिल कर बनाये हम ऐसा गणतंत्र,
जो हो सर्वोच्च-शक्तिमान-श्रेष्ठ प्रजातंत्र |
अंततः यही है हमारा भारत, हमारी मातृभूमि;
कर्तव्य है हमारा इसे बनाना हमारी कर्मभूमि |

-Bhargav Patel (अनवरत)


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7 Comments

  1. देव कुमार - January 23, 2017, 5:11 pm

    Bahut Khoob Bhargav Saab

  2. Bhargav Patel - January 23, 2017, 7:58 pm

    *बाँटते

    A correction.. I just noticed it. Sorry for that.

  3. देव कुमार - January 24, 2017, 1:15 pm

    wlcm

  4. Abhishek kumar - November 25, 2019, 5:48 pm

    Good

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