चल मिटा ले फासले

तेरी खामोसियाँ, खंचर सी है चुभने लगी,
दूरियाँ हर एक चुप्पी पर तेरे, बढ़ने लगी,
एक आवाज देकर, रोक ले मुझे,
ऐसा ना हो कि दूर हो जाऊँ, पहुँच से तेरे,
चल मिटा ले फासले, कुछ गुफ़्तगू कर ले |

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3 Comments

  1. Devki jadon - June 26, 2016, 4:59 pm

    bahut khoob sirji

  2. देव कुमार - June 28, 2016, 12:57 pm

    Bhut Khob

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