चाय

उषा की रश्मि
जब घोलती है चाय में चुस्ती,
शुरू करते है दिन हम अपना |
लेकिन शाम आते-आते
आन पड़ती है फिर एक चाय की जरुरत;
घोली हो जिसमे
संध्या ने कोई अलौकिकता
हमारे तन में
नये प्राण डालने के लिए |

~ Bhargav Patel (अनवरत)


लगातार अपडेट रहने के लिए सावन से फ़ेसबुक, ट्विटर, इन्स्टाग्राम, पिन्टरेस्ट पर जुड़े| 

यदि आपको सावन पर किसी भी प्रकार की समस्या आती है तो हमें हमारे फ़ेसबुक पेज पर सूचित करें|

4 Comments

  1. देव कुमार - January 23, 2017, 4:57 pm

    Bahut KHoob

  2. देव कुमार - January 23, 2017, 5:09 pm

    Swagatam

  3. Abhishek kumar - November 25, 2019, 5:48 pm

    Awesome

Leave a Reply