छलावा

संवेदनाएँ भी अपना अस्तित्व भूल गई हैं,
शायद वेदनाएँ मुखौटा पहन कर मिली होंगी उनसे।


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By Ram

4 Comments

  1. Lucky - January 26, 2018, 11:13 am

    बहुत बहतरीन मेरी रचना प्रतियोगिता में है आप कमेन्ट करें

  2. राही अंजाना - July 31, 2018, 11:54 pm

    Waah

  3. Abhishek kumar - November 27, 2019, 10:41 am

    Very nice

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