जीवनसमुद्र

कट जाते है दिन
पैसो की झनकार सुनने के लिए |
किन्तु रात आते-आते
शुष्क पड़ जाता है वह जीवनरस;
जिसे पीने के लिए
मथते रहते है जीवनसमुद्र |

-Bhargav Patel (अनवरत)


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3 Comments

  1. Sridhar - January 24, 2017, 9:54 am

    shaandaar janaab

  2. Abhishek kumar - November 25, 2019, 5:52 pm

    सुन्दर रचना

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