मुक्तक

तुमको मैं जबसे खुदा मान बैठा हूँ!
जिन्द़गी को गुमशुदा मान बैठा हूँ!
खोजती हैं महफिलें जमाने की मगर,
खुद को मैं सबसे जुदा मान बैठा हूँ!

#महादेव_की_कविताऐं'(22)

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Lives in Varanasi, India

2 Comments

  1. सुरेश - January 19, 2017, 3:51 pm

    वाह, वाह!

  2. देव कुमार - January 19, 2017, 5:37 pm

    kya bat mahadev ji

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