“शहीदों” की “शहीदी”

हुए बहुत लोग शहीद मेरे देश को बचाने को, पर उन “शहीदों” की “शहीदी” आज खुद शहीद सी लगती है। देश में हो रहे हंगामो में खुद कही गुम सी लगती हैं। जिस दिन औरत-आदमी का सामान अधिकार हो जायेगा, यकीन मानो उस दिन “शाहिदो” की “शाहीदी” को सलाम हो जायेगा।।।। जिस दिन निर्भया जैसी लडक़ी सरेआम बेआबरू होने से बच जायेगी, उसी दिन मेरे देश की शाहिदो की शाहीदी अमर हो जायेगी। जब शाहिदो ने शाहीदी के वक़्त धर्म,जात-पात न देखा, तो हम क्यों इन ढकोस्लो में पड़ते है। आ बसंती चोले को काले रंग में रंगते है।। शहीद होने का मतलब बस प्राण देना नहीं होता, अपने समाज देश को हर बुराई से आज़ाद करना होता है, तभी उनकी कुर्बानी “शहीदी” कहलायेगी, उनके नाम और बलिदान को शीतिज पर लहरायेगी।। -द्वारा ज्योति Previous Poem Next Poem