ashmita, Author at Saavan's Posts

पहले से ज्यादा

जिन्हें चाहते थे खुद से भी ज्यादा न निभा सके वो अपना वादा तन्हा जब छोड़ दिया जमाने ने हमको हम खुद के करीब हो गए पहले से ज्यादा »

तेरे साये में बस हमे रहना है

नजरो से तुम क्या बयां करते हो करीब आ कर कहो जो कहना है हँसी नजारे न सही, अंधेरा ही सही तेरे साये में बस हमे रहना है »

अंधेरा

रोशनी तो रुखसत हो गयी है अरसे पहले अंधेरा है जो अब तलाक साथ है मेरे »

मेरे शिक्षक

मेरे जीवन के अहम इंसान तुम्ही से स्पन्दित यह विश्व महान सरस्वती माँ के तुम सारथी हो तुम्ही से ज्ञान की गंगा का उत्थान मेरा नमन स्वीकार करें पथ मेरा आप सदा प्रदर्शित करें अपने आदर्शों के पाठो से मेरा भविष्य होगा महान »

राखी का त्योहार है आज

राखी का त्योहार है आज, आजादी का जशन भी है बहन की खातिर जीना भी चाहता हूँ देश पर मार मिटाने का मन भी है। (देश के सैनिक की मन की बात) »

जब होगा दीदार रब का

जब होगा दीदार रब का तो पूछुंगी मैं की तेरी इबादत मोहब्बत में इतनी अड़चने क्यों हैं »

कोई क्या कहता है

कोई क्या कहता है परवाह किसे है आंखे जब मुहब्बत से रोशन है तो रातो दिन की फिक्र किसे है »

वह दर्द बीनती है

वह दर्द बीनती है टूटे खपरैलों से, फटी बिवाई से राह तकती झुर्रियों से चूल्हा फूँकती साँसों से फुनगियों पर लटके सपनों से न जाने कहाँ कहाँ से और सजा देती है करीने से अगल बगल … हर दर्द को उलट पुलटकर दिखाती है इसे देखिये यह भी दर्द की एक किस्म है यह रोज़गार के लिए शहर गए लोगों के घरों में मिलता है .. यह मौसम के प्रकोप में मिलता है … यह धराशाई हुई फसलों में मिलता है … यह दर्द गरीब किसान... »

हमारे हर लम्हे की कोशिश

हमारे हर लम्हे की कोशिश तुम्हारी रूह तक जाने की थी मगर अफ़सोस आप ही इससे अनजाने थे »

मुझे बारिश में भीगना पसंद था

मुझे बारिश में भीगना पसंद था, तम्हें बारिश से बचना… तुम चुप्पे थे, चुप रह कर भी बहुत कुछ कह जाने वाले। मैं बक-बक करती रहती। बस! वही नहीं कह पाती जो कहना होता। तुम्हें चाँद पसंद था, मुझे उगता सूरज। पर दोनों एक-दूजे की आँखों में कई शामें पार कर लेते। मुझे हमेशा से पसंद थीं बेतरतीब बातें और तुम्हें करीने से रखे हर्फ़। सच! कितने अलग थे हम.. फ़िर भी कितने एक-से। »

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