मुक्तक

mera Raja beta

Mera Raja beta »

किश्तें बाकी रह गई

गलतफहमियों की कितनी और किश्तें बाकी रह गईं, इंसानों की कितनी और देखनी किस्में बाकी रह गईं।। नज़र-नज़ारे दिल-दिमाग और जुदाई सबपे लिखा मैंने, कहना मुश्किल है के और कितनी नज़में बाकी रह गईं।। राही अंजाना »

माहिर

जितना सुलझाती है उतना ही उलझाती है मुझको, उधेड़कर पहले खुद सिलना सिखलाती है मुझको, खोलकर दिल को जोड़ने में माहिर बताने वाली वो, सच को रफू कर बस झूठ ही दिखलाती है मुझको।। राही अंजाना »

वक्त से गुजारिश

उस सूखे पेड़ पर क्या चिड़िया फिर न चहचहाएंगी सूख गया जो शजर वक्त की बेवक्त मार से क्या उस शजर की डालियाँ फिर न लहराएगी जिन्दगी बन गयी गुमसुम और, हम गुमनाम बनकर रह गए क्या जीवन में खुशियों की वो घडियां, कभी लौटकर न आएंगी आखिर क्या उदासी ही छाई रहेगी इधर कभी खुशियाँ इधर न आएंगी। 2-वक्तकी मार से झुलसी हुई जमीं क्या सूखे से बच, पुनः जीवित हो जाएगी सूख गई जो फसलें, इक- इक पल के इन्तजार में क्या पलटेगी ... »

सहारे

समन्दर के कभी दो किनारे नहीं मिलते, हमसे तो आकर ही हमारे नहीं मिलते, बात ये है के विचारधारायें भिन्न हैं सभीकी, तभी तो ढूढे से किसी को सहारे नहीं मिलते।। राही (अंजाना) »

मैं हर बात पर रूठ जाता हूं

जरा सी बात में टूट जाता हूं , गुस्से से आकर फुट जाता हूँ। लोग समझते है आदत है मेरी मैं हर बात पर रुठ जाता हूँ। हृदय पर हल्की घाट होती है, बिना बात की बात होती है। बढ़ जाता है द्वेष का किस्सा, फिर मन मे खुराफात होती है।। गलतफहमी धीरे से बढ़ जाती है। गुरुर दिमाग में गढ़ जाती है। मन मे बनती है ख्याली पुलाव, कुछ और ब्यथा बढ़ जाती है।। बुराई का मैं सरताज नही हूँ। बुझदिलों का आवाज नही हूँ। प्रलयकारी होता है... »

प्रेम कविता

प्रेम कवितासबने प्रेम पर जाने क्या-क्या लिखा फ़िर भी अधूरी ही रही हर प्रेम कविता »

Barsaat

इन हाथों में अरसों तक थी उनके हाथ की खुशबु। जैसे रातरानी से महकती रात की खुशबु। इत्र हो गई जो बूंदें लिपटकर उनसे, दुनिया को ये भरम कि ये बरसात की खुशबु। »

माईने

सच और झूठ के माईने बदल गए, ऐसा हुआ क्या के आईने बदल गए, साध के बनाई जब हाथों की लकीरें, तो राहों में लोग क्यों लाईने बदल गए, राही अंजाना »

दिखावे के प्यार

दिखावे के प्यार दिखावे का खुला आसमां मिला जब भी उड़ना चाहा मुझको बस नीचे का रास्ता मिला »

Page 1 of 6123»