Ghazal

और एक जाम

खत्म न हो जश्ने-रौनक हँसीन शाम की। आ टकरा लें प्याला और एक जाम की। देखो साकी खाली ना होने पाए पैमाना, ले आओ सारी मय, मयकदे तमाम की। आ टकरा लें प्याला और एक जाम की। वक्त की क्या हो बात, जब दोस्त हों साथ, फिर किसे परवाह, हालाते-अंजाम की। आ टकरा लें प्याला और एक जाम की। कोई गम नहीं, फिर होश रहे या ना रहे , पर्ची लिख छोड़ी जेब में, अपने नाम की। आ टकरा लें प्याला और एक जाम की। चार दिन की है ये जवानी, ये... »

मुहब्बत का खुमार

तेरे आने से दिल को करार आया है। तुझे पाकर खुशियां बेशुमार पाया है। मैंने पी नहीं लेकिन, मैं नशे में चूर हूं, मुहब्बत का ये कैसा, खुमार छाया है। मौसमें भी अब रंगीन सी लगने लगी, पतझड़ ने भी कैसा, बहार लाया है। एक दूजे में हम, डूबे कुछ इस कदर, तू जिस्म है, तो मेरा आकार साया है। मेरी जिंदगी तो है, एक खुली किताब, फिर क्यों लगता, असरार छिपाया है। तेरे सिवा कोई और नज़र आता नहीं, निगाहों में बस तेरा, निगा... »

छोड़ दिया

मैंने ज़ाम से ज़ाम टकराना छोड़ दिया। यारों मैंने पीना – पिलाना छोड़ दिया। खबर जो फैली, कि मैं हो चला बै-रागी, दोस्तों ने महफ़िल में बुलाना छोड़ दिया। दोस्ती का मतलब जानता हूं मैं, लेकिन, मतलब कि दोस्ती निभाना छोड़ दिया। हुए क्या ज़रा जो दूर, हम महफ़िल से, मुश्किलों में मिलना मिलाना छोड़ दिया। दोस्तों पे दोस्ती निसार है आज भी ‘देव’, दोस्तों ने दोस्ती आजमाना छोड़ दिया। देवेश साखरे ... »

Mere khyabo me tum roj chale ate ho

मेरे ख्वाबों में तुम रोज चले आते हो , ख्वाब टूटते ही तुम दूर चले जाते हो, जिंदगी बेजान न हुई होती इतनी , छोड़कर अगर तुम न जाते मुझको, तेरी तस्वीर इन आंखों में उतार बैठे हैं, ऐसा लगता है तुम्हें मीत बना बैठे हैं , तेरे बिना जीना मुझे गवारा ही नहीं, मैं तेरी हूं तेरी ही रहूंगी तूने यह जाना ही नहीं, यह तन्हाई मुझे जीने भी देंगी नहीं, चले आओ क्यों रूठे हो मेरे भोले सनम…. »

Mere khyabo me tum roj chale ate ho

मेरे ख्वाबों में तुम रोज चले आते हो , ख्वाब टूटते ही तुम दूर चले जाते हो, जिंदगी बेजान न हुई होती इतनी , छोड़कर अगर तुम न जाते मुझको, तेरी तस्वीर इन आंखों में उतार बैठे हैं, ऐसा लगता है तुम्हें मीत बना बैठे हैं , तेरे बिना जीना मुझे गवारा ही नहीं, मैं तेरी हूं तेरी ही रहूंगी तूने यह जाना ही नहीं, यह तन्हाई मुझे जीने भी देंगी नहीं, चले आओ क्यों रूठे हो मेरे भोले सनम…. »

अंजान सफर

मंज़िल पता नहीं, निकला हूं अंजान सफर में। अमृत ढुंढने निकला हूं , दुनिया भरी ज़हर में। इंसानियत बांध कर सभी ने, रख दी ताक पर, डरता हूं कहीं गिर ना जाऊं, खुद की नज़र में। नज़रें चुराकर चले हैं जो, ज़ुल्म होता देखकर, आईना बेचने निकला हूं मैं, अंधों के शहर में। आबरू महफूज़ है, ना कोई जाने- हाफ़िज़ है, लूटने के बाद निकले हैं लेकर, शम्मा डगर में। ख़ुदा भी खुद रोया होगा, हालाते-जहां देखकर, ऐसी तो न सौंप... »

दौर आ चला है

देखो फिर किचड़ उछालने का दौर आ चला है। खुद का दामन संभालने का दौर आ चला है। लाख दाग सही, खुद का गिरेबां बेदाग नहीं, दुसरों की गलतियां गिनाने का दौर आ चला है। वादों की फेहरिस्त तो, फिर से लंबी हो चली, इरादों को समझने समझाने का दौर आ चला है। बरसों से निशां पे फ़ना हैं, कुछ एक नादां मुरीद, शख्सियत पे बदलाव लाने का दौर आ चला है। वहां रसूख़दारों की मिलीभगत, पूरे ज़ोरों पर है, यहां दोस्तों के लड़ने लड़ा... »

मैं जाम नहीं

छलक जाए पैमाना, मैं जाम नहीं। भले खास ना सही, पर आम नहीं। एक बार गले लगा कर तो देखो, भूला सको मुझे, वो मैं नाम नहीं। गुरूर नहीं मेरा, खुद पर यकीन है, आज़मा लो, पीछे हटाता गाम नहीं। तुमको माना देवकी, मुझ ‘देव’ की, पर अफसोस है, की मैं राम नहीं। देवेश साखरे ‘देव’ 1.गाम- कदम »

तारीफ़ तेरी

तारीफ़ तेरी, नहीं मेरी जुबां करती है । नजरें पढ़ ले, हाले-दिल बयां करती है । इश्क में हूँ तेरे आज भी, जहां जानता है, तेरा हुश्ने-मुकाबला, कोई कहाँ करती है । माना बरसों पुराना, इश्के-फसाना हमारा, पर आज भी, इश्के-मिसाल जहां करती है । एक तेरे सिवाय, नहीं कोई और जिंदगी में, शक मुझ पर, बेवजह, ख़ामख़ाह करती है । कल के लिए, हम अपना आज ना खो दें, कल का फैसला, जिंदगी की इम्तहां करती है। देवेश साखरे ‘... »

नक़ाब

नक़ाब से जो चेहरा, छिपा कर चलती हो। मनचलों से या गर्द से, बचा कर चलती हो। सरका दो फिर, गर जो तुम रुख से नक़ाब, महफिल में खलबली, मचा कर चलती हो। तेरे आने से पहले, आने का पैगाम आता है, पाज़ेब की छन – छन, बजा कर चलती हो। तेरी एक दीद को, तेरी राह पे खड़ा कब से, तिरछी नज़रों से दीदार, अदा कर चलती हो। डसती है नागिन सी, तेरी बलखाती गेसू, पतली कमर जब, बलखा कर चलती हो। देवेश साखरे ‘देव’ »

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