अंतहीन समस्याएँ

इस महामारी में
आमजन के कष्टों की दासताँ
जानना हो तो
बस एक दिन गुजारिए
उनके बीच, उनसे मिल,
जिनके दिन बितते
आजीविका तलाशते
रातें बीतती आने वाली
परेशानियोंको गिन।
हमें तो बस उन्ही नीतियों की
आश और दरकार है
जिनसे पेट उनका भर सके
जो हो गये बेरोजगार हैं ।
सरकारी राहतों से,
ज़रूरतें पूरी होती नहीं
मिले अनाजों से,
भूख मिटती नहीं
हर जगह फैला भ्रष्टाचार है।
सिर्फ चावल, गेहूं के सहारे
कैसे घर- परिवार चल पाएगा
गैस की किल्लते, बढती महंगाई
मुँह चिढ़ाते सामने आ जाएगा
अंतहीन समस्याओं से जीना दुष्वार है ।

Related Articles

प्यार अंधा होता है (Love Is Blind) सत्य पर आधारित Full Story

वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥ Anu Mehta’s Dairy About me परिचय (Introduction) नमस्‍कार दोस्‍तो, मेरा नाम अनु मेहता है। मैं…

Responses

  1. गरीबों और बेरोजगारों की लाचारी का यथार्थ चित्रण करती हुई बहुत ही भावुक रचना ।

  2. वर्तमान में जो कुछ हो रहा है
    उसका बहुत सुंदर चित्रण
    गरीबी तथा बेरोजगारी से अवगत कराती सुंदर कविता

New Report

Close