अच्छी कवितायें मत लिखना मेरे दोस्त

अच्छी कवितायें मत लिखना मेरे दोस्त
चंद पैसों में तोले जाओगे
जैसे ही आगे बढ़ोगे
तमाम तरह की गालियां खाओगे।

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जो तुम चिर प्रतीक्षित  सहचर  मैं ये ज्ञात कराता हूँ, हर्ष  तुम्हे  होगा  निश्चय  ही प्रियकर  बात बताता हूँ। तुमसे  पहले तेरे शत्रु का शीश विच्छेदन कर धड़ से, कटे मुंड अर्पित करता…

Responses

  1. आदरणीय पंडित विनय शास्त्री जी, आपको सर्वश्रेष्ठ आलोचक का सामान मिलने पर बहुत सारी बधाई, सावन को धन्यवाद, इससे साबित होता है कि साहित्य की आलोचना आम जीवन की बुराई करने वाली जैसी आलोचना नहीं होती है, बल्कि कवि की संवेदना व् शिल्प पर उसे प्रोत्साहित करना सच्ची साहित्यिक आलोचना होती है, कविता की कमियां ढूंढकर की गयी आलोचना अच्छी साहित्यिक आलोचना नहीं होती है, अतः आपको बधाई , सावन से सही व्यक्ति चुने।

    1. कृपया आप सब एक दूसरे को ताने मारना बन्द करें।
      सिर्फ कविता लिखें और दूसरे की कविताओं का आनंद लें।
      आप सब बड़े हो चुके हैं बच्चों की तरह पेश मत आइए।

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