अटल अविचल धर पग बढ़ नारी

अटल अविचल धर पग बढ़ नारी
जीवन मे नव इतिहास गढ़ नारी
नारी है तू यह सोच न कमतर
कम॔ कर तू अभिनव हटकर
तुझसे बंधा है सुख परिवार का
सव॔ सुख दे सदा तू श्रेयस्कर
आत्मबल से लक्ष्य पकड़ नारी
अटल अविचल धर पग बढ नारी
उलझन तनाव डिप्रेशन अवसाद
जिंदगी की महज परीक्षा है
उत्तीर्ण हो सदा सजग बनकर
यही सम्पूर्ण नारी शिक्षा है
धीरज से मंजिल राह पकड़ नारी
अटल अविचल धर पग बढ नारी
जननी माता बहन बेटी तू ही
पत्नी प्रेयसी तेरा रूप अनेक
बिन तेरे सुना है सव॔ जहान
निज अंदर यह भाव तू देख
कम॔ से मर्यादा शिक्षा जकड़ नारी
अटल अविचल धर पग बढ नारी ????✍✍✍✍✍
श्याम दास महंत
घरघोडा (रायगढ )
दिनांक 8-3-2018 (?)

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