अत्याचार

फकत रोने से काम नहीं चलता है,
अत्याचार तो अत्याचार है, सबको खलता है
प्रतिकार करो , मत करो सहन
क्षमता से अपनी जीतो दिल
बात पते की कहती हूं,
अत्याचार सहना बढ़ावा है
एक और अत्याचार को बहन..

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Responses

  1. ”प्रतिकार करो , मत करो सहन
    क्षमता से अपनी जीतो दिल”.
    बहुत ही सुंदर पंक्तियाँ, जबरदस्त प्रतिभा है। सटीक लिखती हैं आप। वाह वाह

    1. समीक्षा के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद सर।आपकी प्रेरक समीक्षा हेतु बहुत बहुत आभार 🙏

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