“अपनेपन का एहसास”

क्यों अपनों के बीच
अपनेपन का एहसास नहीं होता
क्यों वो हर एहसास खास नहीं होता
कुछ तो कमी होगी मेरे ही अन्दर,
जो कोई अपना होकर भी साथ नहीं देता….

Related Articles

दुर्योधन कब मिट पाया:भाग-34

जो तुम चिर प्रतीक्षित  सहचर  मैं ये ज्ञात कराता हूँ, हर्ष  तुम्हे  होगा  निश्चय  ही प्रियकर  बात बताता हूँ। तुमसे  पहले तेरे शत्रु का शीश विच्छेदन कर धड़ से, कटे मुंड अर्पित करता…

प्यार अंधा होता है (Love Is Blind) सत्य पर आधारित Full Story

वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥ Anu Mehta’s Dairy About me परिचय (Introduction) नमस्‍कार दोस्‍तो, मेरा नाम अनु मेहता है। मैं…

Responses

  1. यूं लग रहा है जैसे
    दर्द का एक जाम पी लिया
    आपकी कविता ने मन को भाव विभोर कर दिया..
    उच्चकोटि का शिल्प और संवेदना की प्रबलता है आपकी लेखनी में||

  2. कहने को तो कहती हैं ये दुनिया
    साथ देंगे हम तुम्हारा
    जब काम आती हैं साथ देंगे को
    तो क्यूं साथ छोड़ देती ये ज़माना

New Report

Close