अपने मन को कभी न डगमगाना

अपने मन को
कभी न डगमगाना
भले ही त्याग दे,
तुझको ये स्वारथ का जमाना,
अपने मन को
कभी न डगमगाना।
भले ही लाख परेशानियां
आएं तुझ पर।
मगर तू लौह सा बन हौसला रखे रखना।
अपने कदमों को बढ़ाते रहना,
किसी से झूठी आस मत रखना,
खुद की मेहनत में भरोसा रखना,
गन्दी बातों से किनारा रखना,
सच का सच में तू सहारा रखना,
जीतना मंजिलों को
जीतकर फिर खिलखिलाना,
अपने मन को
कभी न डगमगाना।


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6 Comments

  1. Chandra Pandey - October 22, 2020, 4:28 pm

    वाह वाह very very nice

  2. Piyush Joshi - October 22, 2020, 5:32 pm

    वाह बहुत ही जबरदस्त लिखा सर आपने

  3. Geeta kumari - October 22, 2020, 5:56 pm

    कवि सतीश जी ने निज मेहनत के बलबूते पर अपनी मंज़िल पाने और
    उस जीत की खुशी को प्राप्त कर सच्ची ख़ुशी मिलने की भी सुंदर बात कहीं है । सुन्दर लय बद्ध शैली और बेहतर शिल्प के साथ बेहद शानदार प्रस्तुति..

  4. Rishi Kumar - October 22, 2020, 6:56 pm

    अति सुंदर

  5. Devi Kamla - October 22, 2020, 10:38 pm

    कमाल का लेखन, जयकार हो

  6. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - October 22, 2020, 11:26 pm

    सुंदर

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