अब डूबने के डर से बेखौफ हो गया हूँ मैं

अब डूबने के डर से बेखौफ हो गया हूँ मैं,
लहरों से सीख़ आया हूँ वापस लौट के आने का हुनर।।
– राही (अंजाना)

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