अब तो संभलो…!

अब तो संभलो…!
—————————-
स्वार्थ के हर रंग मेें
रंग गया है दिल…..देखो
और मुस्कुराकर कह रहें हैं—
ये दुनियाँ कितनी रंगीन है……!!

“मतलब” के रस्से से अब
बँध गया है तन…….देखो
प्यार के वो कच्चे धागे
मिल नहीं रहें हैं , आज
महंगाई से मामला ग़मग़ीन है……!!

औपचारिकता के रोग लगें हैं-
हर लोग यहाँ बीमार हैं
डॉक्टर भी पड़ा है शय्या पर-
अपनें-अपनें दर्द में लीन हैं……!!

चमक सच्चाई की सह नहीं सकते
अब चश्मा सबके नयनों पर है
दूसरों को आँखें दिखाना–हिम्मत कहाँ.?
अजी,नज़र तो सबकी अपनों पर है
मुखड़े तो दिख पड़ते साफ-सुथरे से—
मन ही तो सबका मलीन है……..!!

प्रदूषित हो चुका मानस–पटल
खिलखिलानें के अन्दाज़ बदले
जिह्वा की सीमा ही ना रही–
ध्वनि अब होती दिशाहीन है……!!

ऐ ‘रंजित’ कैसे हो अब—?
दिल हँसता–बोलता ‘मुन्ना’ सा
भाव लगाव और कशिशें–
रिश्ते हो रहे आज प्रेमविहीन है……!!

सँभालने की क़सम भी–
अब सँभलती नहीं उनसे
भ्रष्टाचार बोल रहा-सब मौन हैं
अच्छाईयाँ हो रहीं गौण हैं
चीखना–चिल्लाना क्या करोगे..?
गूंगे-बहरे के लिबास में वे पदासीन हैं…..!!

अब तो सँभलो…..!
ऐ सुधी मानवों..
हर विकार–दूषित विचार
सब छोड़ अपनाओ संस्कार–
सच्चाई और प्रेम ही है बुनियादें–
जीवन की—-जानकर भी—
क्यूँ हो गए सभी ज्ञानहीन हैं……!|

—-रंजित तिवारी
पटेल चौक , कटिहार (बिहार)
पिन–854105
सम्पर्क–8407082012

Related Articles

अब तो संभलो

स्वार्थ के हर रंग मेें रंग गया है दिल…..देखो और मुस्कुराकर कह रहें हैं— ये दुनियाँ कितनी रंगीन है……!! “मतलब” के रस्से से अब बँध…

दुर्योधन कब मिट पाया:भाग-34

जो तुम चिर प्रतीक्षित  सहचर  मैं ये ज्ञात कराता हूँ, हर्ष  तुम्हे  होगा  निश्चय  ही प्रियकर  बात बताता हूँ। तुमसे  पहले तेरे शत्रु का शीश विच्छेदन कर धड़ से, कटे मुंड अर्पित करता…

प्यार अंधा होता है (Love Is Blind) सत्य पर आधारित Full Story

वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥ Anu Mehta’s Dairy About me परिचय (Introduction) नमस्‍कार दोस्‍तो, मेरा नाम अनु मेहता है। मैं…

…..बढ़ रहा है क्यों–??

…..बढ़ रहा है क्यों–?? —————————- प्यार दिखता नही,नफ़रत घटती नहीं तक़रार का अंगार बढ़ रहा है क्यों…? इंसानियत मिलती नहीं,हैवानियत मिटती नहीं संस्कारों का बिखराव…

Responses

New Report

Close