अस्तित्व पर सवाल…!!

अभी तक अस्तित्व पर
ना कोई सवाल उठा था
जो देखता था मुझको
बस वाह ! करता था
मेरी खुशियों की झोली
बहुत थी भारी
ख्वाबों में अपना उधार चलता था
किस्मत की लकीरें
मिट गईं अचानक
अस्तित्व पर कई सवाल भी उठे प्रज्ञा !
जितनी मुस्कुराहटें
पड़ी थीं पलंग पर
सारी बिखर गईं और मैं सिमट गई..


लगातार अपडेट रहने के लिए सावन से फ़ेसबुक, ट्विटर, इन्स्टाग्राम, पिन्टरेस्ट पर जुड़े| 

यदि आपको सावन पर किसी भी प्रकार की समस्या आती है तो हमें हमारे फ़ेसबुक पेज पर सूचित करें|

6 Comments

  1. Geeta kumari - November 19, 2020, 2:26 pm

    बहुत सुंदर अभिव्यक्ति

  2. Virendra sen - November 19, 2020, 8:48 pm

    सुंदर अभिव्यक्ति

  3. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - November 21, 2020, 8:29 am

    बहुत खूब

Leave a Reply