आंसू ठहरे थे

आंसू ठहरे थे उनकी पलकों पर ,
मगर गिरना नहीं चाहते थे ,
भीतर उठा था तूफान,
पर बहना नहीं चाहते थे।

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Responses

      1. इतनी औपचारिकता क्यों प्रतिमा?
        आप मुझे अपना ही समझकर बात करो मैम ना बोलो…

      2. जी बिल्कुल😊 मगर उसके लिए अनौपचारिक भी होना जरूरी है चलो शुरुआत हम करते हैं! फ्रेंड रिक्वेस्ट भेज कर!

  1. न जाने कौन सा आँसू मेरा राज़ खोल दे,
    हम इस ख़्याल से नज़रें झुकाए बैठे हैं।

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