आगाह किये देता हूँ…

‘आगाह किये देता हूँ मैं ज़माने की ठोकर को,
मैं ज़मीं पे पड़ा पत्थर नही, ज़मीं में गढ़ा पत्थर हूँ..’

– प्रयाग

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Responses

  1. एकदम सही….
    पड़ा पत्थर ठोकर से, लुढ़क ही जाता है,
    गढ़ा पत्थर ठोकर से, चोट दे के जाता है।

      1. 🙏🙏 सब आप कवियों की संगत का ही असर है। बहुत धन्यवाद

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