**आज उसी वृद्धाश्रम में***

छोंड़ दो इस बुढ़िया को
किसी वृद्धाश्रम में
यह सुनकर मुझको थोड़ा गुस्सा आया
एक दिन फिर तंग आकर पत्नी से
वृद्ध माँ को आश्रम मैं छोंड़ आया
रोया बहुत माँ से लिपटकर
माँ का दिल भी भर आया
माँ ने आँसू पोंछे अपने आंचल से
और उनको मुझ पर प्यार आया
बोली बेटा आते रहना
अपने घर का भी खयाल रखना
मत रोना मुझको याद करके
मेरे लिए बहू से मत लड़ना
मेरा क्या है
मैं कब मर जाऊं
तू रहना खुश और आते रहना
यह कहकर माँ ने कर दिया विदा…
आज उसी वृद्धाश्रम में
मैं भी आ गया रहने के लिए सदा
मेरा बेटा भी मुझे बोझ समझकर
मुझे यहां छोंड़कर हो गया दफा…

Related Articles

प्यार अंधा होता है (Love Is Blind) सत्य पर आधारित Full Story

वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥ Anu Mehta’s Dairy About me परिचय (Introduction) नमस्‍कार दोस्‍तो, मेरा नाम अनु मेहता है। मैं…

दुर्योधन कब मिट पाया:भाग-34

जो तुम चिर प्रतीक्षित  सहचर  मैं ये ज्ञात कराता हूँ, हर्ष  तुम्हे  होगा  निश्चय  ही प्रियकर  बात बताता हूँ। तुमसे  पहले तेरे शत्रु का शीश विच्छेदन कर धड़ से, कटे मुंड अर्पित करता…

Responses

New Report

Close