आज कुछ गा लूँ मैं

आज कुछ गा लूँ मैं
तुम्हें सुना लूँ मैं,
गीत ही गीत में भुला कर के
दिल में अपने बसा लूँ मैं।
मिटा दूँ सब की सब
गलतफहमी,
सच्चा गायक हूँ
यह बता दूँ मैं,
पूरा लायक हूँ
यह दिखा दूँ मैं
निकाल कर
पलों की फुर्सत तुम
बैठ जाओ, तुम्हें सुना दूँ
गीत के बोल की देकर थपकी
गोद में प्यार से सुला दूँ मैं।
तुम्हारे स्वप्न में भी शामिल हो
आज अपना तुम्हें बना दूँ मैं।


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2 Comments

  1. Geeta kumari - January 14, 2021, 11:49 am

    कविता लेखन से गीत गायन तक का सुंदर सफ़र तय करता हुआ कवि सतीश जी द्वारा रचित बहुत ही सुन्दर गीत…उम्दा लेखन

  2. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - January 14, 2021, 2:50 pm

    अतिसुंदर

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