आज रह-रह के वही..

‘आज रह-रह के वही शख्स याद आता है,
मैं उसे जब भी मनाता था, मान जाता था..
मेरे ज़ाहिर से ग़म भी आज ना दिखे उसको,
जो बारिशों में मेरे आँसू जान जाता था..’

– प्रयाग

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Responses

  1. लाजवाब👌
    पूरा महीना आपने अपनी लेखनी से हृदय को आह्लादित करके रखा, उसके लिए प्रयाग सर आप बधाई के पात्र हैं
    ईश्वर आपको और ज्यादा सामर्थ्य प्रदान करें और हमेशा स्वस्थ रहें और ऐसे ही हमें अच्छी-अच्छी रचनाएं पढ़ने का अवसर प्रदान करते रहे 🙏👏👏👏👏धन्यवाद

    1. एक सच्चा साहित्यकार ही किसी और रचनाकार की इस तरह समीक्षा कर सकता है आपके इस उत्साहवर्धन को सलाम

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