आन बान

आन बान शान में जले मेरी जवानी,
लहू के कतरे को देख तड़पे मेरी जिंदगानी।
अहर्निश के वादों को मैं संजो कर‌ रखता,
कभी भूल सकता नहीं वीरों की बलिदानी।।

✍महेश गुप्ता जौनपुरी


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5 Comments

  1. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - June 21, 2020, 7:17 pm

    Nice

  2. Pragya Shukla - June 21, 2020, 9:41 pm

    Nice

  3. Master sahab - June 22, 2020, 9:44 am

    👌

  4. Abhishek kumar - July 10, 2020, 11:17 pm

    👌👌

  5. Abhishek kumar - July 31, 2020, 2:39 am

    ❤❤🌹🌹👏👏

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