आपकी खामोशियाँ

प्यारे मित्रो
सुप्रभात अभिवादन ,
सपरिवारसहर्ष स्वीकार करें….
आपका अपना मित्र
जानकी प्रसाद विवश

“**आपकी खामोशियाँ “**
*************

आपकी
खामोशियाँ
भी ,
हर घड़ी
हैं बोलतीं ,

मौन
रहकर भी ,
हृदय के ,भेद सारे
खोलतीं ।

आपके
इस मौन से ,
मन में,
उठा भूकंप है ,

भावनाएँ ,
घड़ी के पैंडल ,
सरीखी डोलतीं ।

जानकी प्रसाद विवश

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