आपकी पंक्तियों से

आपकी पंक्तियों से मन हुआ गदगद हमारा,
इस तरह के स्नेह का भूखा रहा है मन हमारा।
नेह यह, आशीष यह यूँ ही रहे सिर पर हमारे,
प्रेम बढ़ता ही रहे यह चाहता है मन हमारा।
@शास्त्री जी


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7 Comments

  1. Geeta kumari - November 22, 2020, 10:29 pm

    ✍️👌👌👏👏

  2. Pragya Shukla - November 22, 2020, 10:43 pm

    बहुत खूब
    शास्त्री जी को समर्पित
    प्रेम और सम्मान भरी पंक्तियां…
    शास्त्री जी हमेशा बिना
    किसी पक्षपात के सबकी हौसलाअफजाई करते हैं

  3. Rishi Kumar - November 23, 2020, 11:24 am

    अति सुंदर

  4. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - November 25, 2020, 7:57 am

    सुंदर

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