आप आए बहार आई

जब लिखता था मैं, ग़ज़ल मयखाने में,
तब सुबह से शाम हो जाया करता था।
ए दोस्त जब वह आते थे सज धज कर,
तब मेरी जान में जान आ जाया करता था।।


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10 Comments

  1. Priya Choudhary - June 4, 2020, 4:54 pm

    Nice

  2. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - June 4, 2020, 6:35 pm

    Nice

  3. Pragya Shukla - June 4, 2020, 7:40 pm

    Very good👌

  4. Panna - June 6, 2020, 12:45 pm

    nice

  5. Praduman Amit - July 3, 2020, 8:07 pm

    Abhar

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