आप क्या हैं

बुढापा हो,
औऱ उस पर
बीमारी हो,
औऱ कोई सहारा
भी न हो,
जेब में दो कौड़ी भी न हो,
सड़क के किनारे
पड़ा हुआ शरीर हो,
उसे देखकर
यदि आपका मन
आपको झकझोरता है
तो आप
इंसान हैं।
राह चलती
कोई बिटिया
सुनहरे स्वप्न लेकर
चल रही हो,
आप उसको
कुदृष्टि से देखते हैं
तो आप हैवान हैं।

Related Articles

दुर्योधन कब मिट पाया:भाग-34

जो तुम चिर प्रतीक्षित  सहचर  मैं ये ज्ञात कराता हूँ, हर्ष  तुम्हे  होगा  निश्चय  ही प्रियकर  बात बताता हूँ। तुमसे  पहले तेरे शत्रु का शीश विच्छेदन कर धड़ से, कटे मुंड अर्पित करता…

प्यार अंधा होता है (Love Is Blind) सत्य पर आधारित Full Story

वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥ Anu Mehta’s Dairy About me परिचय (Introduction) नमस्‍कार दोस्‍तो, मेरा नाम अनु मेहता है। मैं…

Responses

  1. बहुत ही भावपूर्ण कविता है जब मानव के अंदर सहानुभूति का एहसास होता है वही अनुभूति मानव को सच्चे मानव बनाती है

  2. सहानुभूति के भाव लिए हुए संजीदा रचना है कवि सतीश जी की
    इंसानियत को समझने वाली सुन्दर रचना

+

New Report

Close