आप

मन के इतने खूबसूरत
आप कैसे हो गए,
आपको किसने सिखाया
इस तरह से स्नेह करना।
आप मे इतनी अधिक
ममता की बातें हैं भरी,
कि आप ऐसी लग रही हो
एक मिश्री की डली।
आपको पाने से आसूदाह हो
प्रसन्न हैं हम।
इत्तिका जब आप हो तो
ऐश से जीते हैं हम।


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7 Comments

  1. Piyush Joshi - October 1, 2020, 10:21 pm

    वाह वाह, बहुत ही खूबसूरत पंक्तियाँ

  2. Devi Kamla - October 1, 2020, 10:30 pm

    वाह वाह, पाण्डेय जी ऐसे ही बिंदास लिखते रहियेगा।

  3. Geeta kumari - October 1, 2020, 10:35 pm

    बहुत ही शानदार कविता,बहुत ख़ूब

  4. Suman Kumari - October 1, 2020, 11:12 pm

    बहुत-बहुत बधाई हो ।
    अतिसुंदर

  5. Isha Pandey - October 2, 2020, 7:29 am

    बहुत खूब, wow, श्रेष्ठ सदस्य पदवी की बधाई सर

  6. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - October 2, 2020, 7:35 am

    अतिसुंदर भाव
    सर्वश्रेष्ठ सदस्य के सम्मान हेतु हार्दिक शुभकामनाएँ

    • Satish Pandey - October 2, 2020, 10:12 pm

      सादर धन्यवाद शास्त्री जी, आपका स्नेहिल आशिर्वाद है।

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