आलिंगन

सांसारिक कुचक्रों में उलझ कर
अपनी मौलिकता से समझौता
करते मानव सुनो..!!
अपने भीतर हमेशा बचा कर रखना
इतना सा प्रेम…!!
कि
जब भी कोई व्यथित हृदय तुम्हारा
आलिंगन करे तो उस प्रेम की
ऊष्मा से पिघलकर आँसू बन
बह उठे उसके मन में जमी
पीड़ाओं की बर्फ…!!

©अनु उर्मिल ‘अनुवाद’
(12/02/2021)


लगातार अपडेट रहने के लिए सावन से फ़ेसबुक, ट्विटर, इन्स्टाग्राम, पिन्टरेस्ट पर जुड़े| 

यदि आपको सावन पर किसी भी प्रकार की समस्या आती है तो हमें हमारे फ़ेसबुक पेज पर सूचित करें|

Related Posts

मुस्कुराना

वह बेटी बन कर आई है

चिंता से चिता तक

उदास खिलौना : बाल कबिता

6 Comments

  1. vikash kumar - February 12, 2021, 6:38 pm

    Jay ram jee ki

  2. Geeta kumari - February 12, 2021, 8:12 pm

    जब भी कोई व्यथित हृदय तुम्हारा
    आलिंगन करे तो उस प्रेम की
    ऊष्मा से पिघलकर आँसू बन
    बह उठे उसके मन में जमी
    पीड़ाओं की बर्फ…!!
    ___________पीड़ा का कितना सटीक चित्रण किया है कवि अनु जी ने अपनी रचना में, बिल्कुल अनु जी इतना प्रेम तो होना ही चाहिए,
    बहुत सुंदर भवाभिव्यक्ति,बहुत सुंदर शिल्प और कथ्य

  3. अनुवाद - February 12, 2021, 8:19 pm

    धन्यवाद सखि ❤️🌺

  4. Anu Singla - February 13, 2021, 7:54 am

    पीड़ा की बर्फ बहुत सुन्दर

  5. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - February 15, 2021, 8:48 am

    अतिसुंदर भाव

Leave a Reply