आवाज को नहीं, अपने अलफ़ाज़ को ले जाओ बुलंदी पर

आवाज को नहीं, अपने अलफ़ाज़ को ले जाओ बुलंदी पर
बादलों की गरज नहीं, बारिश की बौछार फूल खिलाती है

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अपहरण

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