आवाज़ बहुत देर तक लगाई

आवाज़ बहुत देर तलक थी लगाई पर क़ोई बोला नहीं,
कानों में किसी के भी मैंने शब्द मीठा कोई घोला नहीं,

एक परिंदा भी था पास बैठा उड़कर आया था कहीं से,
न जाने क्या सोंचता रहा पर मुँह उसने भी खोला नहीं,

नज़र जहाँ भी जाती आँखों में समन्दर का साया रहा,
पर कमाल की बात रही के वो एक पल भी डोला नहीं,

पत्थर भी पत्थर ही रहा जब तक उसपर बैठा रहा मैं,
मेरे हटने के बाद भी देखो किसीने उसको तोला नहीं।।

राही अंजाना

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7 Comments

  1. NIMISHA SINGHAL - September 10, 2019, 9:29 am

    Superb

  2. देवेश साखरे 'देव' - September 10, 2019, 9:31 am

    वाह

  3. महेश गुप्ता जौनपुरी - September 10, 2019, 9:33 am

    बहुत सुंदर प्रस्तुति

  4. राम नरेशपुरवाला - September 10, 2019, 12:10 pm

    Good

  5. Poonam singh - September 10, 2019, 2:06 pm

    Superb

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