*आशाओं के दीप जले*

विश्वास से संबल मिले,
आशाओं के दीप जले,
निराशा का भाव तजकर,
कर्तव्य पथ बढ़ते चले।
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स्वाभिमान को ना चोट पहुंचे,
अभिमान मन में ना पले,
आत्मविश्वास से परिपूरित,
उम्मीदों के सुमन खिले।
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साहस धीरज शील भाव,
श्रद्धा समर्पण मन में रखें,
प्रशस्त हो जाए मार्ग सुंदर,
विकट बाधाएं सब टलें।
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अथक परिश्रम निरंतर प्रयास,
मन में रखकर अटल विश्वास,
कर्तव्य पथ बढ़ते चले,
आओ नया इतिहास गढ़े।।

स्वरचित मौलिक रचना
✍️… अमिता गुप्ता

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