*आशा का एक दीप जलाए*

बैठे हैं आशा का दीप जलाए,
उम्मीद की लौ मन में लगाए।
व्यथा का तिमिर अड रहा,
नैराश्य का आंचल बढ़ रहा
नेत्र नीर नैनों में आए,
प्रेम की दिल में ज्योत जलाए
मन के द्वार पर,
सजा कर स्वप्नों के तोरण,
ढूंढती है आंखें अब आपको
आशा का एक दीप जलाए।।
_____✍️गीता


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6 Comments

  1. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - February 15, 2021, 1:04 pm

    अतिसुंदर भाव

  2. Geeta kumari - February 15, 2021, 6:03 pm

    बहुत-बहुत धन्यवाद भाई जी 🙏

  3. Anu Singla - February 16, 2021, 8:32 am

    खूबसूरत भाव

  4. Satish Pandey - February 22, 2021, 3:47 pm

    सजा कर स्वप्नों के तोरण,
    ढूंढती है आंखें अब आपको
    आशा का एक दीप जलाए
    —— बहुत ही खूबसूरत पंक्तियां, बहुत ही संजीदा भाव, वाह

    • Geeta kumari - February 22, 2021, 6:05 pm

      ख़ूबसूरत समीक्षा हेतु खूब सारा धन्यवाद सर

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