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दुर्योधन कब मिट पाया:भाग-34

जो तुम चिर प्रतीक्षित  सहचर  मैं ये ज्ञात कराता हूँ, हर्ष  तुम्हे  होगा  निश्चय  ही प्रियकर  बात बताता हूँ। तुमसे  पहले तेरे शत्रु का शीश विच्छेदन कर धड़ से, कटे मुंड अर्पित करता…

#‎_मेरा_वाड्रफनगर_शहर_अब_बदल_चला_है‬

‪#‎_मेरा_वाड्रफनगर_शहर_अब_बदल_चला_है‬ _______**********************__________ कुछ अजीब सा माहौल हो चला है, मेरा “वाड्रफनगर” अब बदल चला है…. ढूंढता हूँ उन परिंदों को,जो बैठते थे कभी घरों के…

Responses

  1. शायरी का थोड़ा सा भावार्थ समझाना चाहूंगा सबको–
    सच और झूठ एक दूसरे के विपरीत होते हैं यानि प्रतिद्वंदी।
    सच ,झूठ से नफरत करता है और झूठ ,सच से
    इसीलिए झूठ सच हो समाप्त करने के लिए कोशिश करता रहता है मगर जैसे ही झूठ लोगों के पास जा कर देखता है तो उसे भी हैरानी होती है कि लोगों की जुबान पर केवल वही है ,मतलब झूठ ही रह गया है
    सच तो है ही नहीं कही भी।
    पंक्तियों में झूठ का मानवीकरण किया गया है

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