इक अरसे से कोई ख्वाब नहीं देखा हमने।

इक अरसे से कोई ख्वाब नहीं देखा हमने।
जब से तुम गए आफ़ताब नहीं देखा हमने।।
,
लफ्ज़ दर लफ्ज़ हम क्या क्या नहीं हुए थे।
पर खुद का लिखा किताब नहीं देखा हमने।।
,
हमारी मौत के बाद सजती रहती है महफिले।
मगर जीते जी कभी ख़िताब नहीं देखा हमनें।।
,
अब जिंदगी से नहीं है शिकवे शिकायत कोई।
बस अधूरे सवाल थे जवाब नहीं देखा हमनें।।
,
जिसकों जैसा देखना चाहा वैसा देखा ताउम्र।
साहिल कभी खुद को खराब नहीं देखा हमनें।।
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8 Comments

  1. राही अंजाना - March 18, 2017, 10:48 pm

    Wah

  2. Priya - March 18, 2017, 11:41 pm

    behatreen

  3. Kumar Bunty - March 18, 2017, 11:47 pm

    UMDA

  4. महेश गुप्ता जौनपुरी - September 12, 2019, 7:31 pm

    वाह बहुत सुंदर

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