इश्क का मारा (शायरी)

कोई गरीबी का मारा ,
कोई बदनसीबी का मारा ,
कोई वक्त से परेशान हैं ,
कोई अपनों का मारा ।
मगर वो बेपरवाह सा,
मगन अपने दर्द में,
जो है इश्क का मारा।


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8 Comments

  1. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - August 5, 2020, 8:03 pm

    वाह वाह

  2. Geeta kumari - August 5, 2020, 8:23 pm

    वाह ,क्या बात है

  3. Satish Pandey - August 5, 2020, 10:15 pm

    बहुत ही सुंदर

  4. Pratima chaudhary - September 3, 2020, 8:17 pm

    बहुत ही उम्दा

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