ईश्वर के द्वार

जाओ ईश्वर द्वार पर, मांगो मत वरदान
तन मन धन सब कुछ करो, प्रभु चरणों में दान, सभी कुछ देकर गाओ
कर्ता है भगवान्, आप अभिमान मिटाओ
कह पाठक कविराय, पारिस्थित जैसी पाओ
भाव रखो संतोष, ईश दरवाजे जाओ

Related Articles

दुर्योधन कब मिट पाया:भाग-34

जो तुम चिर प्रतीक्षित  सहचर  मैं ये ज्ञात कराता हूँ, हर्ष  तुम्हे  होगा  निश्चय  ही प्रियकर  बात बताता हूँ। तुमसे  पहले तेरे शत्रु का शीश विच्छेदन कर धड़ से, कटे मुंड अर्पित करता…

हम दीन-दुःखी, निर्बल, असहाय, प्रभु! माया के अधीन है ।।

हम दीन-दुखी, निर्बल, असहाय, प्रभु माया के अधीन है । प्रभु तुम दीनदयाल, दीनानाथ, दुखभंजन आदि प्रभु तेरो नाम है । हम माया के दासी,…

मुझे वरदान दो

कविता -मुझे वरदान दो —————————- वरदान दो वरदान दो मुझे वरदान दो, उठी है जो लहर मुझ में हो विकट रूप जैसा गति तेज सुनामी…

Responses

New Report

Close