उमंग रोशनी है, उसे न मंद रखना

उमंग ऐसी जगाओ स्वयं के जीवन में,
फटक न पाए निराशा कभी भी जीवन में।
रखी नहीं रहती सजा के थाल में खुशियां,
वरन स्वयं की मेहनत से,
जीतनी आज हैं तुम्हें खुशियां।
उमंग रोशनी है, उसे न मंद रखना,
हौसले कम न हों बुलंद रखना।
फूल से बन सको, न बन पाओ,
मगर तहजीब में सुगंध रखना।
कष्ट को तेल की कढ़ाई सा
स्वयं को मानकर जलेबी सा
पहले तपना उबलना भीतर तक
खांड में जा मिठास पी लेना।
खुद के अनुकूल कर परिस्थिति को
कष्ट के बाद सुख से जी लेना।
उमंग बढ़ती रहे बढ़ती रहे
उमंग पर उमंग पा लेना।


लगातार अपडेट रहने के लिए सावन से फ़ेसबुक, ट्विटर, इन्स्टाग्राम, पिन्टरेस्ट पर जुड़े| 

यदि आपको सावन पर किसी भी प्रकार की समस्या आती है तो हमें हमारे फ़ेसबुक पेज पर सूचित करें|

Related Posts

भोजपुरी चइता गीत- हरी हरी बलिया

तभी सार्थक है लिखना

घिस-घिस रेत बनते हो

अनुभव सिखायेगा

5 Comments

  1. Devi Kamla - January 28, 2021, 11:01 pm

    बहुत ही जबरदस्त कविता

  2. Chandra Pandey - January 28, 2021, 11:23 pm

    Very nice

  3. Geeta kumari - January 29, 2021, 7:52 am

    उमंग ऐसी जगाओ स्वयं के जीवन में,
    फटक न पाए निराशा कभी भी जीवन में।
    _______जीवन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण और मन में उमंग जागृत करती हुई कवि सतीश जी की बेहतरीन रचना ।भाव और शिल्प का सुन्दर समन्वय

  4. Suman Kumari - January 30, 2021, 12:32 am

    बहुत सुंदर

  5. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - January 30, 2021, 9:05 pm

    अतिसुंदर भाव

Leave a Reply