उसका बनना चाहिए

जितना खुद से हो सके
सेवा करनी चाहिए,
कष्ट झेलते मानव की
सेवा करनी चाहिए।
इसी बात के लिए हमें
मानव बोला जाता है,
मानव हैं, मानवता का
परिचय देना चाहिए।
स्याह पड़े असहाय की
आशा बनना चाहिए,
जिसका कोई हो नहीं
उसका बनना चाहिए।
बन जाएं कितने बड़े
उड़ें हवा के संग,
लेकिन हमको मूल से
मतलब रखना चाहिए।
दुःखी आंख के आंसुओं को
सोखे जो साथ,
वैसा ही कमजोर का
साथ निभाना चाहिए।


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5 Comments

  1. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - April 8, 2021, 8:03 pm

    बहुत सुंदर रचना

  2. Geeta kumari - April 8, 2021, 8:54 pm

    जितना खुद से हो सके
    सेवा करनी चाहिए,
    कष्ट झेलते मानव की
    ___________ मानव के मन में किसी कष्ट झेलते हुए मानव के लिए सेवा भाव की प्रेरणा देती हुई और मानव को मानवता सिखाती हुई कवि सतीश जी की बहुत ही श्रेष्ठ रचना। अति उत्तम लेखन, लेखनी को अभिवादन

  3. Devi Kamla - April 8, 2021, 10:10 pm

    वाह अति सुन्दर

  4. Pragya Shukla - April 8, 2021, 10:55 pm

    सुंदर पंक्तियां

  5. Deepa Sharma - April 9, 2021, 12:57 pm

    कवि सतीश पाण्डेय जी की बहुत अच्छी कविता, लाजवाब पंक्तियाँ

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