उड़ा खुशबू

हजारी खिल, उड़ा खुशबू
बुला भंवरा, सुना संगीत।
भेज संदेश, प्यारा सा,
बुला तू अब, मेरा मनमीत।
रही है जो, भी चाहत सी
उसे मकरंद में रखकर
सुगंधित कर फिजायें सब,
बढ़ा दे ना, परस्पर प्रीत।
मौसम गया, बरसात का
शरद रितु है, मुहाने पर,
बुला दे प्रिय, को मेरे
न आया जो, मनाने पर।
शब्दार्थ –
हजारी – गेंदा


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10 Comments

  1. Anuj Kaushik - October 13, 2020, 11:06 pm

    अति सुंदर

  2. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - October 13, 2020, 11:09 pm

    अतिसुंदर रचना

  3. Pragya Shukla - October 14, 2020, 12:38 am

    लाजवाब पंक्तियां

  4. Piyush Joshi - October 14, 2020, 7:55 am

    अतीव सुन्दर, वाह वाह,नए तरह की पंक्तियाँ

  5. Geeta kumari - October 14, 2020, 9:03 am

    शरद ऋतु के आने की बहुत ही सुन्दर पंक्तियां ।
    “हजारी खिल, उड़ा खुशबू बुला भंवरा, सुना संगीत।भेज संदेश, प्यारा सा,बुला तू अब, मेरा मनमीत”
    गेंदा के फूलों की सुगंध और भंवरे के संगीत से वातावरण गुंजायमान है
    बहुत ही खूबसूरती से संदेश भेजने की बात कही है कवि ने
    अतीव सुंदर रचना ,शानदार प्रस्तुति

    • Satish Pandey - October 14, 2020, 9:57 am

      कविता के भाव को समझ कर की गई इस खूबसूरत समीक्षा हेतु आपका हृदय तल से आभार, लेखनी की यह प्रखरता बनी रहे। जय हो

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