ऊचाईयों के दौर में

ऊँचाईयों के दौर में
हर कोई ऊँचा उठना चाहे।
विनयचंद इस दौर में
आखिर पीछे रहते हो काहे।।
कर्म करो ऊँचाई पाओ
औरों को नाहीं गिराना तुम।
जो गिरे हुए को उठाओगे
कीर्ति यश वैभव पाना तुम।।
सबको साथ लेकर चलना
प्रस्थ करेगी कामयाबी की राहे।
ऊँचाईयों के दौर में
हर कोई ऊँचा उठना चाहे।।

Published in हिन्दी-उर्दू कविता

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Responses

  1. कर्म करो ऊंचाई पाओ,
    औरों को नहीं गिराना तुम
    बेहतरीन रचना है आपकी सर

  2. बहुत कुछ कह गए आप अपनी कविता में। बहुत ही सुंदर प्रस्तुति है। 

  3. आप ऊँचाई के उस मुकाम पर हैं
    जिसके बारे में कोई सोंच भी नहीं सकता

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