एक और निर्भया

नहीं हूं मैं हिन्दू पहले,
न ही दलित की बेटी हुं।
मैं निर्भया आज की ,
इंसाफ़ मांगती,
मैं पहले देश की बेटी हुं।
क्यों नहीं पसीजा तुम्हारा हृदय,
जब हैवानों ने मुझे शर्मसार किया,
क्यो चुप थी मीडिया सारी,
जब जिस्म मेरा तार-तार किया,
कब मैं इंसाफ पाऊंगी?
या राजनीति में उलझ ,
फिर से दम तोड़ जाऊंगी।
रहेगा फासला वर्षों का,
या पल में इंसाफ पा जाऊंगी,
….मैं निर्भया आज की…


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22 Comments

  1. Ritika bansal - September 30, 2020, 1:26 pm

    She deserve a quick justice. Justice delayed is equal to justice denied.

  2. Pushpendra Kumar - September 30, 2020, 6:09 pm

    इंसाफ मांगती है एक और निर्भया

  3. Neetu Mishra - September 30, 2020, 6:11 pm

    Superior

  4. Anonymous - September 30, 2020, 6:46 pm

    😔

  5. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - September 30, 2020, 7:46 pm

    उत्तम रचना

  6. Aditya Kumar - September 30, 2020, 9:07 pm

    आपकी भावना का सम्मान।

  7. मोहन सिंह मानुष - September 30, 2020, 9:31 pm

    हाथरस घटना से जुड़े बहुत ही मार्मिक व यथार्थपरक भाव

  8. akash choudhary - September 30, 2020, 10:26 pm

    Beautiful

  9. Anuradha Sharma - September 30, 2020, 11:05 pm

    💯👌👌

  10. प्रतिमा चौधरी - September 30, 2020, 11:08 pm

    धन्यवाद

  11. Anonymous - September 30, 2020, 11:25 pm

    दिल को छू लेनी वाली और सोचने के लिए मजबूर केने वाली कविता. 👍😢

  12. Siya Chauhan - September 30, 2020, 11:50 pm

    Yah aaj ka sach hai

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