एक और निर्भया

बस कुछ दिन की बात है
सब भूल जाएंगे
काम – धन्धों में मशगूल हो जाएंगे
नईं कहानी का शोर मचाएंगे
फिर कोई और निर्भया होगी
जीवन की जंग हार जाएगी
कोई कुछ ना करेगा
बस इक नाम और जुड़ेगा।


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22 Comments

  1. Isha Pandey - September 29, 2020, 5:46 pm

    वाह वाह, सुंदर कविता

  2. MS Lohaghat - September 29, 2020, 5:49 pm

    बहुत अच्छी कविता

  3. Satish Pandey - September 29, 2020, 6:00 pm

    फिर कोई और निर्भया होगी
    जीवन की जंग हार जाएगी
    बहुत ही यथार्थ लिखा है आपने। कुछ समय तक काफी बातें होती हैं, फिर सब चुप हो जाते हैं। यथार्थ उजागर करने वाली लेखनी को सैल्यूट

  4. Geeta kumari - September 29, 2020, 6:17 pm

    “कोई कुछ ना करेगा इक नाम और जुड़ेगा”
    यथार्थ चित्रण किया है अनु जी । वास्तविक अभिव्यक्ति

  5. Piyush Joshi - September 29, 2020, 6:23 pm

    वाह आदरणीय अनु जी कम लिखती हैं लेक़िन ठोस लिखती हैं। बहुत खूब

  6. प्रतिमा चौधरी - September 29, 2020, 6:24 pm

    बहुत ही सच्ची बात कही आपने लोग थोड़े दिन ही किसी विषय को महत्व देते हैं बाद में सब अपने अपने रास्ते हो जाते हैं
    जब तक कानून व्यवस्था और और लोगों की सोच ,मैं बदलाव नहीं आता तब तक ऐसे ही चलता रहेगा

  7. Ramesh Joshi - September 29, 2020, 6:26 pm

    अनु जी की कविता लाजवाब है।

  8. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - September 29, 2020, 7:54 pm

    बहुत खूब

  9. Suman Kumari - September 29, 2020, 7:59 pm

    सुन्दर

  10. Anu Singla - September 29, 2020, 9:40 pm

    धन्यवाद

  11. मोहन सिंह मानुष - September 29, 2020, 10:30 pm

    बहुत ही यथार्थ परक सुंदर रचना

  12. Reema Ahirwar - September 30, 2020, 1:40 pm

    👌👌

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