एक तरफा प्यार

यूं मेरे प्यार पर बेवजह शक न जताया कर,
खामोश हूँ, बेवफ़ाई का इलज़ाम न लगाया कर |

जमाने में हँसी हो मुझे ऐसे नज़रअंदाज़ न कर,
चाहत हो तुम मेरी इस बात का इक्तिराफ कर |

अब तक जमाने की रूसवाई से बचाया है तुझको,
सरेआम तमाशा न हो, इस दिल में छुपाया है तुझको |

जमाने में चाहने वालों का, सिलसिला बदस्तूर जारी है,
आज भी उनकी आँखों में, वो प्यास तेरे लिए बाकी है |

खुद को संभाल पाऊं, अब मुझमें वो साहस नहीं,
शिकायतों का दौर था वो, अब उसकी भी इल्तिजा नहीं |

मिलकर भी तुझसे मैं कई बार बिछड़ा हूं,
कैसे कहूं तन्हाई में कितनी बार मैं रोया हूं |

फूलों भरा दिल जो था कभी, अब बिखर चुका है,
नदिया का पानी अब खारा हो गया है |


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2 Comments

  1. Suman Kumari - October 17, 2020, 10:40 pm

    बहुत ही सुन्दर अभिव्यक्ति

  2. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - October 18, 2020, 8:19 pm

    वाह

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