एक ही दीया

हम सब दीप तो जलायेंगे,
बाहरी अंधेर को दूर करने के लिए।
मगर हम वो दीप कब जलायेंगे
मन में छिपे अंधेर को दूर करने के लिए।।
हम हर वर्ष बड़ी उल्लास के साथ
घर आंगन में जलाते है अनेक दीया।
छल कपट के छाती पर कब हम
जलायेंगे स्वच्छता के “एक ही दीया” ??।।


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4 Comments

  1. Pragya Shukla - November 8, 2020, 11:04 pm

    बहुत उम्दा

  2. Rishi Kumar - November 8, 2020, 11:06 pm

    बहुत सुन्दर👌👌👌👌👌🙂

  3. Geeta kumari - November 9, 2020, 2:20 pm

    सुन्दर भाव

  4. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - November 9, 2020, 2:21 pm

    बहुत खूब

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