ऐ बंदे !

उसने हमें जीवन दिया ताकि हम उसकी बनाई दुनिया को
और खुबसूरत बनाए ।
हमने उसी जीवन को किसी और लक्ष्य में लगा दिया,
भगवान हंसे कहा ,”तू कब समझेंगा ऐ बंदे !” ।।

उसने हमें कई रिश्ते दिए माता पिता भाई बहन जो हमें
दिशाहिन ना होने दें ।
हमने उन्हीं रिश्तों में स्वार्थ और लालच मिला दिया,
वाहेगुरु बोले, “तू कब समझेंगा ऐ बंदे !” ।।

उसने बनाया इन्सान, हर कोई एक समान,
कोई फर्क नहीं किया, आत्मा स्वरुप स्वयं बैठ गये ।
हमने उसमें भी भेद भाव कर दिया,
जाति और मजहब जैसे कठोर शब्दों से सबको अलग कर दिया
खुदा हंसा कहा, “तू कब समझेंगा ऐ बंदे!” ।।

हद तो तब हो गई जब हम इस पर भी ना रुके,
भोजन और वस्त्र की लाठी से उस रब को बांटने लगे।
इस पर वो रब रो पड़ा और कुछ ना बोला ।।

अपनी बनाई हुई खुबसूरती,
अपनी दी हुई नेमतों को बिखरते न देख सका ।
और बिना कुछ कहे आज उसने हम सबको ये बता दिया
कि बस अब और नहीं, अब मेरी है बारी ऐ बंदे ! ।।


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8 Comments

  1. प्रतिमा चौधरी - September 24, 2020, 1:41 pm

    बहुत सुंदर अभिव्यक्ति

  2. MS Lohaghat - September 24, 2020, 1:51 pm

    बहुत खूब

  3. Geeta kumari - September 24, 2020, 2:01 pm

    सुन्दर प्रस्तुति

  4. मोहन सिंह मानुष - September 24, 2020, 2:12 pm

    बहुत सुंदर पंक्तियां

  5. Pragya Shukla - September 24, 2020, 2:43 pm

    Beautiful

  6. Gurmeet Malhotra - September 24, 2020, 3:41 pm

    Thank you all for the comments. This will motivate me for more such compositions. Thanks again.

  7. Satish Pandey - September 24, 2020, 5:09 pm

    बहुत खूब

  8. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - September 24, 2020, 8:12 pm

    अतिसुंदर

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