ऐ ज़िन्दगी

ऐ ज़िन्दगी मैंने तुझको दिया क्या है
तेरे लिए किया क्या है
तूने मेरे गम पे खुशियों के वस्त्र ढक दिए
तेरे लिए मैंने सिया किया है

ना रखा तुझे खुश
ना रखा ऐशो आराम में
हर पल तुझसे माँगा
तुझे दिया क्या है

मैं पराया मांगू हर चीज़ स्वार्थ में
तू अपना समझ कर दे निस्वार्थ में
आखिर समझ नहीं आया
ये रिश्ता क्या है

तूने हर वक्त साथ दिया
मेने हर कीमती वक्त है खोया
तू तो हर वक्त मेरे लिए ही जिया है
पर ऐ ज़िन्दगी मैंने तुझको दिया क्या है


लगातार अपडेट रहने के लिए सावन से फ़ेसबुक, ट्विटर, इन्स्टाग्राम, पिन्टरेस्ट पर जुड़े| 

यदि आपको सावन पर किसी भी प्रकार की समस्या आती है तो हमें हमारे फ़ेसबुक पेज पर सूचित करें|

Related Posts

कवि का समर्पण

शहीद को सलाम

चाहता हूँ माँ

हिन्दी सावन शिव भजन 2 -भोला जी की भंगिया |

8 Comments

  1. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - June 11, 2020, 11:54 pm

    Nice poetry

  2. देवेश साखरे 'देव' - June 12, 2020, 11:06 am

    सुन्दर

  3. Manoj Shastri - June 12, 2020, 12:27 pm

    सुन्दर

  4. Priya Choudhary - June 12, 2020, 5:21 pm

    Good

  5. Panna - June 13, 2020, 7:14 pm

    nice

  6. Pragya Shukla - June 18, 2020, 9:02 pm

    👏

  7. Abhishek kumar - July 11, 2020, 12:14 am

    👌👌

Leave a Reply