ओ मेरे प्रियतम कान्हा !!

ओ मेरे प्रियतम कान्हा !!
मुझको तेरी बेरुखी से
डर लगता है,
तुम्हारी आँखों से
साफ पता चलता है…
तुम जिस तरह मायूस निगाहों से
मेरी तरफ देखते हो,
अपनी लाचारी साफ बयां करते हो…
क्यूं समझते हो तुम खुद को अकेला ?
मैं तो तुम्हारी ही हूँ
ये तुम क्यों नहीं समझते हो !
मत सोंचो दुनिया छोंड़कर जाने की,
अभिलाषा रखो मेरा साथ निभाने की…
हौसला रखो ये बुरा वक्त भी कट जाएगा,
तुमने जो देखा है सपना
वह भी साकार हो जाएगा…
हम तुम्हारे लिए कुछ भी कर सकते हैं,
पर हम तुम्हें छोंड़कर जी नहीं सकते हैं…
इरादा नहीं है मेरा
तुमसे ब्याह रचाने का,
सपना है तुम्हारे दिल में आशियां बनाने का…
तेरी रूह से प्यार करती हूँ
जिस्म पर अधिकार नहीं जताऊंगी,
तुम मेरे हो बस एक बार ये कह दो
मैं उसी में स्वर्ग पा जाऊंगी…
मीरा की तरह मैं तो तेरी भक्ति करती हूँ,
सुध-बुध बिसराकर तेरा नाम जपती हूँ….
रुक्मिणी बनने के ख्वाब मैं नहीं देखती !
मैं तो राधा की तरह तेरे प्रेम को तरसती हूँ…
मत छोंड़ जाना तुम मुझे
दुनियां में अकेला,
हो ज्यादा जरुरी जाना !
तो बता देना मुझे,
सबकुछ छोंड़कर, मैं तेरे साथ ही चलती हूँ…


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4 Comments

  1. Geeta kumari - November 20, 2020, 3:07 pm

    निस्वार्थ प्रेम की बहुत ही सुन्दर अभिव्यक्ति

  2. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - November 21, 2020, 8:22 am

    अतिसुंदर भाव

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